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राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव कूच बिहार में सम्पन्न हुआ

पश्चिम बंगाल में कूच बिहार के राजबाड़ी में 11 वें राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव का कल शाम को समाप्त हो गया। इस महोत्सव में दोहर, एक लोकप्रिय बंगाली बैंड, अन्य प्रसिद्ध कलाकार और स्थानीय कलाकार शामिल हुए।

राजबाड़ी के लिए आयोजित महोत्सव के दौरान शानदार महल के मैदान में प्रसिद्ध कलाकारों और संगीतकारों द्वारा प्रदर्शन किया गया जिसमें लोक कलाकारों ने समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गायक और संगीतकार श्री कैलाश खेर और कथक नृत्यांगना सौविक चक्रवर्ती थे, जबकि प्रसिद्ध तबला वादक, बिक्रम घोष ने महोत्सव के उद्घाटन समारोह के दौरान प्रस्तुति दी। संगीत और शास्त्रीय कलाकारों के लिए पिछले तीन दिनों के दौरान अपने प्रदर्शन ने स्थानीय लोगों को विरासत की झलक के बारे में प्रस्तुति दी और इस दौरान यह महोत्सव स्थानीय कलाओं को प्रोत्साहित और संरक्षित करने का एक मंच भी बना। इस अवसर पर हस्तकला मेला भी आयोजित किया गया।

 

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पश्चिम बंगाल में आयोजित संस्कृति महोत्सव का उद्घाटन राज्यपाल श्री जगदीप धनखड़ ने 14 फरवरी को किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का दूसरा चरण अब 22 से 24 फरवरी तक दार्जिलिंग में आयोजित किया जाएगा। राज्य में आयोजित किया जा रहा राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव विविध संस्कृतियों के लोगों के बीच आपसी समझ और संबंधों को बढ़ाएगा, जिससे भारत की मजबूत एकता और अखंडता सुरक्षित होगी।

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संस्कृति मंत्रालय के इस प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव, राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन 2015 से किया जा रहा है। इस महोत्सव में सात क्षेत्रीय संस्कृति केंद्रों की सक्रिय भागीदारी के साथ ऑडिटोरियम और कला दीर्घाओं तक सीमित रहने के बजाय भारत की जीवंत संस्कृति को जन-जन तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। यह अन्य राज्यों में किसी दूसरे राज्य की लोक और जनजातीय कला, नृत्य, संगीत, व्यंजन और संस्कृति के प्रदर्शन में सहायक रहा है और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के पोषित लक्ष्य को सुदृढ़ कर रहा है और साथ ही कलाकारों और कारीगरों को उनकी आजीविका को बढ़ाने के लिए एक प्रभावी मंच भी प्रदान करता है। नवंबर, 2015 से अब तक राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के दस संस्करण विभिन्न राज्यों और शहरों जैसे दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु, तवांग, गुजरात, कर्नाटक, टिहरी और मध्य प्रदेश में आयोजित किए जा चुके हैं।

संस्कृति मंत्रालय और पूर्वी क्षेत्रीय संस्कृति केंद्र कोलकाता द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने सभी सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों को एक साथ लाकर संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाया है और एक भारत श्रेष्ठ भारत के लक्ष्य को भी सुदृढ़ किया।

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